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यादें | Yaaden

Updated: May 7, 2021

जब मैं किसी बच्चे को देखता हूं तो बड़ा ही प्रसन्न चित्त हो जाता हूं, क्योंकि मेरे बचपन की यादें अचानक से ताज़ा हो जाती हैं। ऐसी यादें किसी बच्चे की तरह ही तो होती हैं, एकदम मासूम। जब भी याद आती हैं तो चहरे पर भीनी सी मुस्कान आ ही जाती हैं, चाहे अच्छी यादें हो या बुरी।


यह यादें भी बहुत अजीब होती हैं, कभी यह हमारा मनोबल बढ़ा जाती है, तो कभी बहुत कुछ सीखा जाती हैं, जैसे कब खुद को रोकना है। यह ज़रूरी नहीं है की सिर्फ अच्छी यादें हमे कुछ सीखा जाये, हमारे जीवन में बुरी यादों का भी उतना ही महत्त्व होता है जितना अच्छी यादों का, क्योंकि बुरी यादो से ज़िन्दगी की सीख मिलते है, जो हमे ज़िन्दगी में आगे चलने का हौसला देते है। तो कभी बुरे वक्त पर खुद का हौसला बढ़ाने के लिए, तो कभी अच्छे पल का हर एक कतरा जीने के लिए, यादें हमारी जिंदगी को लम्बा बना देती है। उससे सीखे तो सवांर दे , उसे भुला दे तो उजाड़ दे।


कुछ यादें संगीन होती है और कुछ यादें रंगीन होती है। कुछ हमारी आंखो को नम कर जाती है, तो कुछ गलतियों का एहसास दिलाती है। असल में यादें एक एहसास की तहर ही तो है, जो कल को खोने का, आज के होने का और आने वाले कल को सजोने का एहसास दिलाते है |


यादें किसी स्थान की हो या किसी इंसान की, बुरी हो या अच्छी हो, यादें तो बस बीता हुआ कल है, जो कभी बुरी नहीं हो सकती है। क्योंकि वो तो बीता हुआ कल है जिसे हम सुधार नहीं सकते, लेकिन, जरूरत है हमे उससे सीखने की और आने वाले कल को सुधारने की। जिससे हम अपनी जिंदगी का मक़सद सफल कर सके।



लेखक

सुधांशु

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